जल प्रदूषण पर निबंध ( जल ही जीवन है ) Essay On Water In Hindi

Published by Ankit Kumar on

Jal Pradushan Par Nibadh

नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं। जल ही जीवन निबंध पर यह ग्रेजुएशन परीक्षाओं में बहुत पूछा जाता है। तो आप सभी को इस लेख को जरूर पढ़ना चाहिए।

प्रस्तावना

हम सभी जानते हैं। जल पृथ्वी के प्रकृति के अनमोल उपहारों में से एक है। पृथ्वी पर 71% जल है। मनुष्य के शरीर में लगभग 60% पानी होता है। तथा मस्तिष्क में 85% और रक्त में 79% फेफड़ों में 80% पानी होता है। अर्थात हमारे शरीर में दो तिहाई भाग पानी का होता है। जिससे हमको यह पता चलता है। कि पानी हमारे जीवन में कितना महत्व पूर्ण है। हमारी धरती पर रहने वाले सभी जीव जंतुओं को पानी की आवश्यकता होती है। तथा पेड़ पौधे इत्यादि को जल की आवश्यकता होती है। इसीलिए कहा गया है। कि जल ही जीवन है ।

जल अधिकतम तालाब कुए झील समुंद्र और नहर इत्यादि में मिलता है। जिसमें से 97% पानी सागर तथा महासागरों में है। जो कि खा रहा है और पानी पीने योग्य नहीं है। और 2.4% पानी बर्फ के रूप में जमा हुआ है। उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव में केवल 0.6% पानी पीने योग्य है। पूरे विश्व के महान वैज्ञानिक समुद्र के जल को पीने योग्य बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं। हमारा सारा जीवन पानी पर ही निर्धारित है। हम सभी 3 दिन तक भोजन ना करें जिंदा रह सकते हैं। परंतु हमें एक दिन या 2 दिन पानी ना दिया जाए तो हम जिंदा नहीं रह सकते हैं। इससे हमें या पता चलता है। कि पानी हमारे जीवन में कितना महत्त्व कारी है।

हमने कई बार कई लोगों को पानी बर्बाद करते हुए देखा होगा अगर हमें एक ग्लास पानी की जरूरत होती है। तो हम तीन से चार ग्लास पानी बर्बाद कर देते हैं। एक ग्लास पानी भरने में कुछ लोग जिनके पास मोटर टिल्लू इत्यादि उपकरण होते हैं। वे एक ग्लास पानी के लिए भी उसको स्टार्ट करके पानी भरते हैं।

इसके अलावा हो रहे हैं। जल प्रदूषण हमारे लिए एक बहुत ही बड़ी समस्या का कारण है इस पृथ्वी पर कुछ ऐसी भी जगह है। जहां पर पानी है। ही नहीं और कुछ जगह ऐसी है। जहां पानी बहुत सारा है। काफी देशों में पानी बहुत ही महंगे दामों में बेचा जाता है। बढ़ती जनसंख्या के कारण पानी एक बहुत ही बड़ी समस्या हो सकती है।

हमारी पृथ्वी की रचना गगन ,वायु ,जल, क्षितिज और पावक इन पांच तत्वों से हुई है। हमारी पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीव जंतुओं तथा पेड़ पौधों का आधार जल होता है। जल के बिना हमारा जीवन संभव नहीं हो सकता अतः यह अनिवार्य है। कि सभी को जल संरक्षण करना चाहिए।

जल का महत्व

जल से ही हमारे पूरे संसार में जीवन है। हमारे चारों ओर फैली फसलें फूल हरियाली फल इत्यादि जल के बिना संभव नहीं है।

  • किसान जल से ही फसलों का उत्पादन करते हैं।
  • हमारी पृथ्वी पर जीव जंतु तथा पेड़ पौधे जल के बिना जीवित नहीं रह सकते हैं।
  • पानी पीने से शरीर का तापमान और परिसंचरण इत्यादि बेहतर अच्छे रहते हैं।
  • जल का उपयोग पेड़ पौधे अपना भोजन बनाने के लिए प्रयोग करते हैं।
  • पानी पीने के लिए सिंचाई करने के लिए कपड़े कपड़े धोने के लिए इत्यादि चीजों में जल का उपयोग किया जाता है।
  • जल से बड़े-बड़े कारखाने चलते हैं। जिससे बिजली बनाई जाती है।

रहिमन पानी राखिए ,बिन पानी सब सून, पानी गए ना उबरे ,मोती मानुष चून

कवि रहीम दास जी ने दोहे से जल की महत्ता को उजागर किया है। जल के बिना मनुष्य में प्रतिष्ठा नहीं मोती में कठिनाई तथा चूना में उपयोगिता नहीं।

जल के विभिन्न स्रोत

कृषि करने के लिए जल ही आधार होता है। बिना जल के कृषि नहीं की जा सकती है। हमारे भारत देश में कृषि प्रधान होता है। और हमें कृषि का महत्व इस बात से पता चलता है। की भारती किसान विश्व के 17.5% जनसंख्या का पालन पोषण करते हैं।

जल का उपयोग

घरेलू कार्यों में

कपड़े धोने खाना बनाने इत्यादि चीजों में जल का उपयोग किया जाता है।

उद्योग

अधिकतम फैक्ट्रियों तथा कारखानों में जल की अधिकतम भूमिका होती है। जैसे बिजली बनाना सूती वस्त्रों के देशों को साफ करना इत्यादि।

जल का अभाव

हमारी पृथ्वी पर जल की कमी धीरे-धीरे हो रही है। और वर्षा ( बारिश ) कम होती जा रही है। जिससे धरती का जल धीरे-धीरे नीचे की ओर जा रहा है। जल की समस्या हमारे देश में ही नहीं पूरे विश्व में हो रही है। क्या आपको पता है। की विश्व का तीसरा विश्व युद्ध जल के लिए होगा।

जल का संरक्षण किस प्रकार करें

  • हम सभी को जन संरक्षण के लिए कुछ प्रयास करते रहना चाहिए।
  • हमें जरूरत के अनुसार जल का उपयोग करना चाहिए।
  • पानी पीते समय ग्लास में पानी बच जाता है। तो उसे पौधों में डाल देना चाहिए।
  • हमें जल संरक्षण के लिए परंपरागत तकनीक अपनाना चाहिए।
  • पानी पीते समय पानी ग्लास में उतना ही ले जितना कि पीना हो।

जल संरक्षण से खतरा

हम सभी जानते हैं। कि पृथ्वी पर उपयोग करने लायक जल धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। और इसका बड़ा कारण है। मनुष्य हम इसी तरह से प्रकृति का नाश करते रहे तो तीसरा विश्व युद्ध जल के कमी के कारण होगा।

जल समस्या का समाधान

हम सभी को जल का सदुपयोग करना होगा बारिश के समय में जो पानी नदियों द्वारा समुद्र में जाता है। उस पानी को तालाबों व गड्ढों में इकट्ठा करना चाहिए जिससे कि पानी धीरे धीरे पृथ्वी के अंदर चला जाए। जिससे पानी का स्रोत ऊपर ही मिल सके। इसलिए हम सभी को जल की कमी को लेकर जागरूक होना होगा।

विश्व जल दिवस

22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने का निर्णय वर्ष 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण व विकास की बैठक में स्वच्छ जल हेतु निर्णय लिया था।

22 मार्च 1993 को पहला जल दिवस मनाया गया। ( विश्व )

यूएन वाटर नामक एक कार्यक्रम वर्ष 2003 से चलाया जा रहा है। यूएन वाटर कार्यक्रम के तहत स्वच्छ जल साफ सफाई संसाधनों व जल से संबंधित आपदाओं के मुद्दे पर कार्य किए।

भारत के पहले जल पुरुष

भारत के पहले जल पुरुष का नाम राजेंद्र सिंह है। यह तरुण भारत संघ सरकारी संगठन के चेयरमैन राजेंद्र सिंह को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार 2001 तथा 2015 स्टॉकहोम वाटर प्राइस दिया गया था।

उपसंहार

हम सभी को समय रहते हुए जल संरक्षण पर ध्यान देना होगा। अन्यथा संसार का विनाश हो जाएगा तथा पृथ्वी पर सभी जीव जंतु पेड़ पौधे जल के बिना जीवित नहीं रह सकते।

पृथ्वी का संतुलन मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए बिगाड़ दिया है। इससे मनुष्य ने अपने खतरे की स्थिति करते जा रहा है। मनुष्य पृथ्वी का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना जाता है। इसलिए उसका कर्तव्य बनता है। कि जल संरक्षण पर जोर दे मनुष्य जल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है।

भारत के पहले जल पुरुष कौन थे।

राजेंद्र सिंह भारत के पहले जल पुरुष हैं।

राजेंद्र सिंह को जल संरक्षण पर कौन-कौन से पुरस्कार मिले।

  • रेमन मैग्सेसे पुरस्कार 2001 में मिला था।
  • स्टॉकहोम वाटर प्राइस पुरस्कार 2015 में मिला था।

पृथ्वी पर कितना प्रतिशत पानी है।

71 प्रतिशत पानी है।

कितने प्रतिशत पानी पीने योग्य है।

0.6% पानी पीने योग्य है।


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